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मण्डली-3



वे घने जंगल से होते हुए एक गुफा में पहुंचे. मशालें जल रही थी. जगह-जगह कंकाल-खोपड़ियां बिखरी पड़ी थी. सामने लगभग 15-17 फीट की विशालकाय शैतान की मूर्ति बनी हुईं थी. उस मूर्ति के चरणों में तांत्रिक जादुई जिसका आधा शरीर विष रूपी नीला व आधा सामान्य था, झटा बिखरी हुयी, लंगोट पहने ध्यान में लीन था.
स्वागत है...मण्डली में स्वागत हैं...नौजवानों-जादुई बिना आँखें खोले ही बोला. कबीर-मोहसिन दोनों एक-दूसरे को देखने लगे. जादुई ने बिना आँखें खोले ही मण्डली बनाने के पीछे की वजह बताना शुरू की.


कुछ साल पहले भाखरपुर गाँव के मुखिया अपने बड़े पुत्र की मानसिक बिमारी के चलते दूसरे पुत्र की चाह में तांत्रिक जादुई की शरण में आये थे. जादुई ने शैतानी मन्त्रों और शक्तियों से मुखिया की पत्नी की कोख भरी. बच्चा हष्टपुष्ट व स्वस्थ पैदा हुआ. जिसका नाम पिंटीया रखा. लेकिन तीन साल की उम्र में बरामदे में खेलते

मण्डली-2



साकरियावास

अगली सुबह सरकारी विद्यालय में टेंट-प्रांगण खोले जा रहे था. दो युवा लड़के कबीर और मोहसिन रिक्शे से उतरे है. टेंट खुलते देख दोनों एक-दूसरे को आश्चर्यचकित निगाहों से देखते है.
भाई-साहब टेंट क्यूँ खुल रहे हैं?-कबीर ने एक मजदूर को रोककर पूछा.
कार्यक्रम नहीं होने वाला हैं इसलिए
कौनसा कार्यक्रम?...राजीव जी के N.G.O. वाला
हाँ
क्यूँ?
मैं तो मजदूर हूँ...मुझे क्या पता?
ठीक हैं...राजीव सर कहाँ मिलेंगे?
मैं तो मजदूर हूँ...मुझे क्या पता?-और मजदूर चला गया.
तभी कबीर और मोहसिन की मुलाकात एक सज्जन से हो गयी. N.G.O. के सचिव गोपालकृष्ण बिहारी.
आपकी तारीफ़
जी...हम दोनों भाई हैं...मैं कबीर...और यह मुझसे छोटा मोहसिन
राजीव जी से क्यूँ मिलना हैं?”
हम दोनों उनके N.G.O. पर डाक्यूमेंट्री बनाने आये हैं
दरअसल बात यह हैं कि कल रात से ही उनकी तबियत बहुत ख़राब हैं...इसलिए कार्यक्रम भी कैंसिल कर दिया हैं...तुम्हारा मिलना नहीं हो पायेगा
सर, एक बार मुलाकात हो जाती तो...अच्छा होता...आगे फिर कभी डाक्यूमेंट्री बनाने के बारे में बात हो जाती
अभी बिल्कुल पॉसिबल नहीं है...10 दिन बाद रामगंज आ जाना-और गोपालकृष्ण सामने कमरे में घुस गए.
दोनों भाई उदास हो गए. वापस लौटने के लिए बाइक पर सामने बाँधने लगे. तभी गोपालकृष्ण ने आवाज दी.