शाम का वक़्त था. 13 मंजिली ऊँची बिल्डिंग के छत की दीवार पर बैठा युवक मुंबई अंडरवर्ल्ड में किसी परिचय का मोहताज़ नहीं. जिसकी नजरे नीचे व्यस्त सड़क पर जमी हैं हाथ में व्हिस्की की बोतल.  कद 6 फुट, चौडा सीना, रंग सांवला, मूंछे जो दोनों दिशाओं में नीचे की तरफ मुड़ी हुई, आँखों पर काले चश्मे, हर वक़्त चेहरे पर गंभीर भाव, जीन्स जो एक साइड के घुटने वाले हिस्से से फटी हुयी. शर्ट जिसके सारे बटन खुले, उसके भीतर पहनी मटमैली बनियान, नाम हैं ‘गोटिया पठान’. व्हिस्की को होंठो से लगाता हैं....
         तभी सीढियों से होते तीन लोग गोटिया के पीछे करीब आकर रुके. तीनो गोटिया पठान के ख़ास गुर्गे हैं. पप्पू छमन, फैजल टकलू, मुख्तार टोपी.
“भाई, यह अकरम दिमाग के बाहर होता जा रहा हैं” पप्पू छमन गुस्से में गोटिया पठन से बोला.
“आज क्या किया उस हरामजादे ने?” अपनी बात कहते ही व्हिस्की दुबारा होंठो से लगाईं.
“भाई आज उसने अपने और तीन छोकरा लोगो को मारा रंडी बाजार में,  अगर टकलू वक़्त पर नहीं पहुँचा होता तो उनका गेम फिनिश हो चूका होता, एकदम फिनिश” पप्पू गुस्से में अपने बाल नोचता हैं.

“मामला क्या था?” गोटिया के चेहरे पर अभी भी गंभीर भाव थे.


“भाई रंडी बाजार अपना एरिया हैं अपन चाहे तो रूपये दे वरना नहीं लेकिन अकरम और उसके छोकरा लोग ने रंडियो को रूपये देने से इनकार कर दिया, जब उनसे मांगे गए तो उन्होंने एक के पैर पर गोली मार दी भेनचोदो ने, अपन के छोकरा लोग बीच में आये तो उन्होंने उसे ठोकना शुरू कर दिया, वो तो मुझे एक रंडी का कॉल आया तो वक़्त पे पहुँचा वरना... ” फैजल टकलू की लाल आँखें साफ़ जाहिर कर रही थी की उसे स्वयं पर गर्व महसूस हो रहा था.
गोटिया ने व्हिस्की की बोतल नीचे फेंकी.
“रंडी बाजार नहीं, पूरा मुंबई मेरा एरिया हैं पिछले 5 साल से मेरा सिक्का चलता हैं यहाँ पर, उस कुत्ते को यहाँ आये अभी 3 महीने ही हुए और वो गोटिया से पंगा ले रहा हैं, मेरे छोकरा लोगो को मार रहा हैं, लगता हैं साले का कुछ करना पड़ेंगा”
“भाई, कब करोंगे?, हम पिछले एक महीने से आपको कह कह कर थक गए हैं पर आप हो की एक नहीं सुनते” फैजल टकलू परेशान हो रहा था.
“तीन बार सिर्फ बातचीत करके छोड़ दिया साले को, आप एक इशारा करो अभी गेम करके आता हूँ साले का” मुख्तार टोपी ने पेंट के पिछले हिस्से से गन निकाली.
“गन अंदर डाल टोपी, मेरे पास भी हैं” गोटिया अपनी मूँछों पर ऊँगली फेरते हुए दीवार से उतरा.
“भाई, अगर ऐसा ही चलता रहा ना, तो वो दिन दूर नहीं जब अपना गेम होना स्टार्ट हो जायेंगा....” गोटिया ने पप्पू छमन के कंधे पर हाथ रखा, वो बोलते-बोलते रुक गया.
“....और अपन को सबसे ज्यादा हफ्ता रंडी बाजार से ही मिलता हैं अगर वहां कोई दूसरा आकर अपनी चलायेंगा तो अपन की तो लग गयी ना” पप्पू छमन मुंह बिगाड़ने लगा था.
“कहाँ मिलेंगा यह अकरम?” गोटिया ने आँखों पर से चश्मे उतारते हुए पूछा.
“भाई रोज रात 11 बजे अफसाना बार में, बार खाली होने के बाद अकेला वहीँ बैठकर पीता हैं” मुख्तार टोपी बोला.
“आज की रात वो पीयेंगा नहीं खायेंगा भी, गोली” गोटिया ने दुबारा चश्मे पहने.
अफसाना बार रात 11 बजे....
             बार पूरा खाली पड़ा था लाइट म्यूजिक बज रहा था,  हल्की पीली रौशनी चारो तरफ फैली थी. बारटेंडर अपनी कुर्सी पर बैठे टीवी पर नजरे जमाये था. बीचोबीच की एक टेबल पर अकरम बैठा था. आसमानी कुर्ता-जीन्स, छोटे-छोटे बाल, हल्की दाढ़ी, रंग गोरा, खुशमिजाज़ शक्ल, पतला-लम्बा कद, हाथ में सिगरेट. टेबल पर एक बैगपाइपर की बोतल, एक सोडा की बोतल, आइस, एक गिलास जो आधा भरा था. कुछ देर बाद उसे गोटिया, छमन, टोपी, टकलू बार के भीतर आते हुए दिखाई पड़े, उन्हें देखते ही वो सिगरेट फर्श पर फेंकता हैं और बारटेंडर को अंदर जाने के लिए इशारा करता हैं. गोटिया उसके सामने पड़ी कुर्सी पर आकर बैठा, जीन्स के पिछवाड़े से गन निकाल टेबल पर रखी. उसके तीनो गुर्गे उसके पीछे खड़े थे. दोनों एक-दुसरे की आँखों में आँखें डाल घुर रहे थे.
“बातचीत करने नहीं आया आज” गोटिया एक नजर टेबल पर रखी गन पर डालकर बोला.
“मुझे भी बातचीत पसंद नहीं” अकरम भी अपनी जीन्स के पिछवाड़े से गन निकाल टेबल पर रखता हैं.
            इतना सुनते ही गोटिया ने टेबल पर से अपनी गन उठा अकरम के सीर पर लगा दी. अकरम मुस्कुराने लगा. गोटिया ने धीरे से पीछे मुड़कर देखा, उसके तीनो गुर्गे उसी पर गन तानकर खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे. गोटिया हक्का-बक्का रह गया. अकरम अपनी कुर्सी से हँसते हुए, ताली बजाते हुए उठा और अपनी गन गोटिया के सीर पर लगा दी. गोटिया ने अपनी गन टेबल पर पटक दी.
“गेम के अंदर भी एक गेम खेला जाता हैं” अकरम हँसते हुए गोटिया से कहा, गोटिया का चेहरे का रंग उड़ चूका था.
1 महीने पहले....

इसी अफसाना बार में अकरम ने छमन, टोपी, टकलू से मुलाक़ात की थी.
“हमे क्यूँ बुलाया यहाँ मिलने?” पप्पू छमन ने अकरम से पूछा.
“गोटिया के साथ रहकर खुश हो” अकरम मुस्कुराते हए बोला.
“काम की बात बोलो, खाली फ़ोकट टाइम वेस्ट मत कर?” मुख़्तार टोपी बोला.
“जितना गोटिया देता हैं उससे 4 गुना ज्यादा दूंगा”
“बदले में कुछ तो माँगोगे ही?” फैजल टकलू बोला.
“यह तो अंडरवर्ल्ड की फितरत हैं, मुझे मुंबई पर राज करना हैं, तो गोटिया चाहिए....जिंदा, अपने हाथो से मारकर किंग बनना हैं मुझे”
“4 गुना मिलेंगा?” छमन ने पूछा.
“8 गुना” अकरम गंभीर भाव से बोला.
“काम हो जायेंगा” इतना कहते ही तीनो उठने लगे.
“पर एक शर्त हैं”
“क्या?”
“मुझे गेम के अंदर गेम पसंद हैं, तुम उसे मेरे गेम के बहाने लाओंगे और फिर मैं उसका गेम कर दूंगा”
“ठीक हैं” तीनो चले जाते हैं वहां से.
        उस दिन से तीनो गोटिया को अकरम के खिलाफ भड़काते हैं ताकि वो अकरम का गेम करने जाए और उसका गेम हो जाए.
        अफसाना बार में गोटिया पर चार गन तानी हुयी थी, उसके पीछे उसके तीनो गुर्गे और सामने अकरम.
गोटिया भाई गेम ओवर, आई ऍम द न्यू किंग ऑफ़ मुंबई, गुड बाय” अकरम ने ट्रिगर पर अंगुली रख दी. गोटिया उसकी आँखों में बेख़ौफ़ देख रहा था. अकरम ने ट्रिगर दबाया....
          ....और पप्पू छमन के भेजे के आर पार कर गई. वो धडाम से फर्श पे गिरा. गोटिया ने अपनी दोनों कोहनी से टकलू और टोपी के पेट पे मारा और वो भी फर्श पे गिर गए, उनकी गन उनसे दूर जा गिरी. तीनो फर्श पर गिरे थे, छमन बिच में मरा पड़ा था, टकलू और टोपी दायें-बाएँ, गोटिया और अकरम उनके सामने गन ताने खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे. टकलू और टोपी दोनों भौचक्के फर्श पर पड़े उन्हें देख रहे थे. उनका गला मानो ऐसे सूख गया हो की शब्द बाहर ही नही निकल रहे थे.
“....और उस गेम के अंदर भी एक गेम खेला जाता हैं” अकरम गुस्से में अपने दांत भिचते हुए बोला.
“अकरम मेरा छोटा भाई हैं, दुबई में बहुत बड़ा स्मगलर हैं, तीन महीने पहले मेरे कहने पे ही यह मुंबई आया था, सबको लगता था हम दोनों एक दुसरे के खिलाफ हैं, लेकिन यह मेरा गेम था ताकि इससे पता तो चले कौन मेरे साथ हैं और कौन मेरे खिलाफ?, हराम के पिल्लो गोटिया पठान की मौत का सौदा कर आये थे लेकिन गोटिया ने तुम्हारा सौदा कर लिया मौत से....” गोटिया जोशीले अंदाज़ में दहाड़ रहा था.
“....चुतिया समझ के रखा हैं क्या मेरे को?” इतना कहते ही दोनों ने अंधाधुंध उन पर गोलियां बरसना शुरू की. दोनों का भी मौत से सौदा सफल हो चूका था. फर्श पर खून ही खून फैलने लगा था.
दोनों भाई एक-दुसरे की तरफ देख जोर से हँसे, फिर अपने जीन्स के पिछवाड़े में गन लगा दी.
दोनों भाई बार के अलग-अलग दरवाजे से बाहर निकले और गोटिया दायीं ओर मुड़ गया, जबकि अकरम बायीं ओर.
“हर गेम के अंदर एक गेम खेला जाता हैं और उस गेम के अंदर भी एक गेम”

THE END.