यात्रीगण कृपया ध्यान दे 12479 सूर्यनगरी एक्सप्रेस जोधपुर से.... सूरत, अहमदाबाद के रास्ते.... बांद्रा टर्मिनस को जाने वाली.... कुछ ही समय में प्लेटफार्म नंबर 1 से रवाना होने वाली हैं. जोधपुर रेलवे स्टेशन पर कंप्यूटराइज्ड फीमेल वोईस ने अलाउंस किया.

एक खूबसूरत कपल एक दुसरे का हाथ पकडे प्लेटफार्म पर मोहब्बत की सैर कर रहा था.
हटिये, हटिये, साइड दीजिये पीछे से 10-12 सूटकेस, बैगो से लदी लारी लिए आ रहे कुली ने आवाज दी.
एक दुसरे का हाथ छोड़ दोनों अलग हुए और लारी तेजी से उनके बीच से निकलती आगे बढ़ने लगी, उसके पीछे एक मोटी तगड़ी औरत और उसकी 3 मोटी बेटियां लारी के पीछे-पीछें भाग रही थी.
खाते-पीते घर की लगती हैं सब सामन से लदी लारी और दौड़ती मोटी फैमिली को देख प्लेटफार्म पर खड़े एक सज्जन ने चुटकी ली.
पानी बोटल, ठंडी पानी बोटल, सिर्फ 10 रूपये, 10 रूपये ट्रेन की खिड़की में झांकते हुए एक फटे-पुराने कपडे पहने लड़का धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था.
कुड़ियों का नशा प्यारे नशा सबसे नशीला हैं.... जिसे देखू वो यहाँ हुस्न की बारिश में गीला हैं.... भीड़, रेलवे अलाउंसर, ट्रेन-इंजन, खाने-पीने की सामग्री बेचने वालो के शोर-शराबे के बीच भी इस फ़िल्मी गाने के बोल लोगो के कानो तक कभी धीरे तो कभी तेज़ पहुँच रहे थे.
भीड़ को चीरते हुए एक लड़का, नाम अप्पू, उम्र 14 साल, आँखों में चमक थी लेकिन मटमैले चेहरे का गहरा रंग
आँखों की चमक को फीका कर रहा था, बिखरे धुल-मिट्टी से भरे बाल, मैला सा कमीज़-नेकर पहने, दायें कंधे पे फटा-पुराना थैला लटकाया हुआ, दोनों पैरो को चप्पले अलग-अलग रंग की, गाने की आवाज उसके कमीज़ के जेब में रखे चाइना मोबाइल से आ रही थी.

बूट-पॉलिश वाला, बूट-पॉलिश वाला चलते-चलते उसकी नजरे नीचे ज़मीन पर लोगो के पैरो में पहने जूतों की तरफ थी. गाना अभी भी तेज आवाज में बज रहा था.
साहब, जूते पॉलिश कर दूँ
नहीं सूट-बूट पहने अधेड़ उम्र के युवक ने उसकी तरफ देखे बिना ही जवाब दे दिया.
एकदम चकाचक कर दूँगा
चकाचक ही हैं कुछ पल के लिए ही सही पर उसकी तरफ युवक ने नजरे डाली.
कहाँ साहब, इतनी तो धुल जमी हुई हैं अप्पू नीचे बैठ अपना हाथ जूते पर फैरने लगे. उसके हाथ फैरते ही युवक ने अपना पैर पीछे खिसकाया.
एक बार ना बोला समझ में नही आता क्या? इस बार उस युवक की आँखें आवेश से लाल होने लगी थी.
मुस्कुराते हुए अप्पू फिर से आगे बढने लगा. मोबाइल में नया गाना शुरू हो चूका था....बद्तमीज़ दिल..... उसके मोबाइल की तेज़ आवाज से प्लेटफोर्म पर खड़े लोग मुस्कुरा रहे थे, मगर अप्पू अपनी मस्ती में मस्त इन मुस्कराहट से बेखबर अपनी नजरे जमीन से चिपके जूतों पर टिकाये चल रहा था.
छोटू इधर आ कुर्सी पर बैठे तकरीबन 50 साल का आधा गंजा आदमी, गोल्डन फ्रेम का चश्मा पहने, तोंद निकली हुई, एक हाथ में अखबार, दिखने में किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं लग रहा था.
जी साहब! अप्पू ख़ुशी से उसकी तरफ भागा.
जूते पॉलिश कर दे अपने जूते निकाल अप्पू की तरफ बढ़ा दिये.
अप्पू फर्श पर बैठ गया. थैले से कपडा निकाल जूते साफ़ किये, फिर उसने पॉलिश का सामान निकाल शुरू हो गया. मोबाइल में गाना बदल गया था....आला रे आला, मान्या आला....
बड़े फ़िल्मी लगते हो अखबार में नजरे जमाये हुए ही बोले.
साहब! यह अप्पू का स्टाइल हैं, तेज आवाज में गाने सुनते हुए काम करना, इससे कस्टमर लोग भी बोर नहीं होते 14 साल का होते हुए भी उसकी बातों में दम था. मोबाइल निकालकर साहब को दिखाता हैं. मोबाइल बड़ा सा भारी वजन का चाइना मोबाइल, जिसके पीछे का ढक्कन ढीला होने के कारण उसने मोबाइल पर रब्बर लगा रखा था.
साहब मुस्कुराने लगे.
और जब भी मैं और मेरी जुड़वाँ बहन घर पर अकेला महसूस करते हैं तो मोबाइल में गाना बजाकर खूब नाचते हैं अप्पू मुस्कुराते हुए बोला.
अकेला क्यूँ?
वो माँ-बाप जिंदा नहीं हैं ना अप्पू सहज भाव से बोला.
साहब के माथे पर अफ़सोस की सलवटे पड़ने लगी, लेकिन अप्पू तो आदी था इस सवाल का जवाब देने का.
वैसे एक बात बता तुझे यह चाइना मोबाइल मिला कहाँ से? साहब ने एक और सवाल किया.
लारी पर से चोरी किया था साहब अप्पू ने इधर-उधर देख थोडा धीरे से कहा.
चोरी, चोरी करना गलत बात हैं ना साहब कुछ ज्यादा ही अपनेपन पर आ गये थे.
क्या साहब आप भी, पढ़े लिखे लोग भी तो इस देश में चोरी कर रहे हैं, लुट रहे हैं, मैं एक अनपढ़ गरीब ने मोबाइल चुरा लिया तो इसमें गलत क्या? साहब अप्पू को ऐसे देख रहे थे जैसे कोई बड़ा आदमी बोल रहा हो, अप्पू की इस सवाल का जवाब उनके पास नहीं था.
तू लगता नहीं की 14-15 साल का हैं
यही तो अप्पू का स्टाइल हैं अप्पू जोश में बोला.
साहब हो गया, देखो क्या लापचिक चमक रहे हैं आपके जूते अप्पू ने पॉलिश का सामन थैले में डालना शुरू किया.
साहब ने 10-10 की पाँच नोट आगे की. अप्पू ने उसमें से सिर्फ एक नोट उठायी.
सब रख ले साहब शायद उसकी बातों से प्रभावित हुए थे.
शुक्रिया साहब, लेकिन अपन जितना काम करता हैं उतना ही रुपया लेता हैं, यह अप्पू का स्टाइल हैं
ईनाम समझ के रख ले
मैंने कोई अच्छा काम किया ही नहीं तो फिर किस काम का ईनाम? अप्पू अपना थैला उठा चल दिया. साहब बाकी नोट जेब में रख आँखें अखबार में जमा दी. अखबार के मुख्य-पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में लिखा था....एसपी करोड़ो की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार....
             एक लड़का पोल के पीछे से अप्पू को आते देख रहा था, शायद उसका इंतज़ार कर रहा था. अप्पू पीने के पानी के नलों की तरफ गया. थैला जमीन पर रख मोबाइल में गाने बंद कर उसे कमीज़ की जेब से निकाल नेकर की जेब में डाला. नल को मुँह लगा अप्पू पानी पीने वाला ही था की.... पोल के पीछे छुपा लड़का भागता हुआ अप्पू की तरफ आया और उसका थैला ले भाग गया. पानी पीते अप्पू की नजर उसका चुरा भागते लड़के पर पड़ी.
अबे चोर साले रुक नल खुला ही छोड़ अप्पू चोर लड़के के पीछे भागा

              पास ही रेलवे ट्रैक पर एक लम्बे हॉर्न के साथ ही सूर्यनगरी एक्सप्रेस रवाना हुई. प्लेटफार्म पर अप्पू उस लड़के की तरफ भाग रहा था तो पास की पटरियों पर ट्रेन अपनी गंतव्य स्थान की तरफ. अप्पू, चोर भागते-भागते प्लेटफार्म के आखिरी छोर तक पहुँच चुके थे, ट्रेन का इंजन भी प्लेटफार्म के आखिरी छोर तक. चोर लड़का रपट से नीचे उतरते ही ट्रेन के इंजन के सामने छलांग लगा ट्रेन के दूसरी तरफ कूद गया. अप्पू भी कूदने वाला था लेकिन ट्रेन ने उसका रास्ता रोक दिया. ट्रेन तेजी से अप्पू के सामने से निकल रही थी, उसके डिब्बो के दरवाजो से चोर लड़का भागता हुआ नजर आ रहा था. अप्पू निराश-हताश जमीन पर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा. ट्रेन की आवाज में उसके रोने की आवाज को कोई सुनने वाला न था.
आज के कमायें रूपयें भी थैले के साथ चले गये, आज रात को बहन को क्या खिलाऊंगा?, फिर कल भी तो होंगा यह बात सोचते-सोचते हुए आँखों से बूंदों की धार तेज होने लगी थी. तभी वह अचानक उठा और अपने आंसू पोंछ स्टेशन से बाहर आया. अप्पू मोबाइल की दूकान पर गया अपना चाइना मोबाइल बेचने ताकि आज रात के खाने के बंदोबस्त कर सके और कुछ रूपये बचेंगे तो नया पॉलिश का सामान खरीद लेंगा. दुकानदार के मना करते ही उसकी आँखों से आंसू छलक पड़ते, लेकिन अपने आंसू पोंछ हौसला बनाये रख अगली दूकान की तरफ बढ़ता. लेकिन किसी भी दुकानदार ने उसका मोबाइल नहीं ख़रीदा. पुरे रास्ते रोते-रोते वो घर पहुँचा. सारी कहानी उसने अपनी बहन को सुनाई. उसको रोता देख उसकी बहन ने भी रोना शुरू कर दिया, दोनों एक दुसरे से गले मिल काफी देर तक रोते रहे. भूखे पेट नींद तो आ न रही थी साथ ही में अप्पू को कल चिंता सताए जा रही थी.

अगले दिन अप्पू पुलिस स्टेशन गया. ड्यूटी पर था थानेदार गोपीनाथ.
साहबजी, रिपोर्ट दर्ज करवानी हैं अप्पू के आवाज आज वो पहले जैसा जोश नहीं था.
तुझे? थानेदार ने 14 साल के अप्पू को ऊपर से नीचे तक घुरा.
हाँ, साहबजी वो मेरा थैला खो गया
कितना माल था थैले में? थानेदार नाक में उंगुली डालते हुए बोला.
माल तो क्या होगा साहब, बस जूते पॉलिश करने का सामान और 75-80 रूपये
जूते पॉलिश करने का सामान, 75-80 रूपये और तुझे रिपोर्ट दर्ज करवानी हैं की पुलिस तेरे थैले को ढूंढे थानेदार की आवाज के तेवर कुछ बदला सा लग रहा था.
जी साहब बड़ी मेहरबानी होंगी अप्पू हाथ जोड़कर विनती करने लगा.
भूतनी के, पुलिस के पास अब और कोई काम नहीं बचा जो तेरा थैला ढूंढने जायेंगी, लोगो के करोड़ो के गहने, गाड़ियां चोरी हो जाती हैं, कभी मिली क्या? थानेदार ताव में बोला.
साहबजी दुसरो लोगो की बात छोड़ो ना, मेरा थैला ढूंढकर लाके दे दो
पहले मेरे सवाल का जवाब दे करोडो के गहने-गाड़ियां कभी मिली क्या?
कैसे मिलेंगी साहब चोर-पुलिस मौसेरे भाई अप्पू समझ गया था की थानेदार उसके थैले में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा था.
क्या बोला रे?थानेदार गुस्से में अपनी कुर्सी से उठा और अप्पू के कान को जोर से मरोड़ने लगा.
हरामजादे, तमीज से बोल मेरे थाने में आकर मेरे को ही गाली देता हैं अप्पू दर्द से कराह रहा था, उसके हाथ से अपने कान को छुड़ाने का असफल प्रयास कर रहा था. अप्पू का चेहरा जब पूरा लाल पड़ा तब उस थानेदार ने उसका कान छोड़ा.

गाली नहीं दी हैं साहब बस कडवा सच बोला हैं, आपको आदत नहीं ना ऐसा सच सुनने की, बाकी लोग सच बोलने के बजाय मुँह पर पैसे मारकर जाते हैं, पर यह अप्पू का स्टाइल हैं जो सच हैं उसे मुँह पर बोलो अप्पू अपने पुराने अंदाज़ में लौट आया था.
साले तेरी इतनी हिम्मत तूने मुझे रिश्वतखोर कहा और देखते-देखते ही थानेदार ने अप्पू की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी. अप्पू फिर से जोर-जोर से रोने लगा था.
साहबजी रिपोर्ट दर्ज कर लो, उस थैले से मेरे और मेरी बहन का पेट भरता हैं, अब पेट कैसे भरू?
एक बार रिपोर्ट दर्ज कर दी तो रोज थाने में आ आकर सर खायेंगा, तू खुद ही ढूंढ ले तेरा थैला, नहीं मिले तो पेट भरने के लिए अपनी बहन को कोठे पर बिठा दियो थानेदार वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गया.
               अचानक अप्पू खड़ा हुआ. अब उसकी आँखें निडर थी और अगले ही पल टेबल पर पड़ी घंटी को उसने थानेदार के सिर पे दे मारा. काफी खून निकलना शुरू हो गया था. अप्पू वहां से भाग गया. दो कांस्टेबल काफी देर तक उसका पीछा करते रहे, लेकिन वो हाथ में नहीं आया. कांस्टेबल वापस लौट गये थे लेकिन अप्पू अभी भी सड़क पर भाग रहा था की तनिक वो एक लड़के से जा टकराया. वो लड़का उसके थैले का चोर ही था. टक्कर से अप्पू का थैला ज़मीन पर गिरा हुआ था. अप्पू ने उस लड़के को जोर से धक्का मार ज़मीन पर गिरा दिया और फिर उसके ऊपर टूट पड़ा. थानेदार का सारा गुस्सा उस लड़के पर उतार दिया. लोगो ने अप्पू रोकने की 

कोशिश की लेकिन वो वापस उस लड़के पर हमला कर देता. आखिरकार पुलिस ने आकर अप्पू को गिरफ्तार कर दिया. लड़का बेहोश हो गया था, उसके सीर, नाक, मुँह, कान से खून निकलने लगा था. अप्पू को वापस उसी थाने में ले जाया गया, लेकिन थानेदार गोपीनाथ शायद घर चला गया था वरना अप्पू के लिए थाने में रात गुजारना मुश्किल हो जाता. पूरी रात जेल में अप्पू को सिर्फ उसकी बहन की चिंता सता रही थी, सिवाय इसके की कल कोर्ट में क्या होंगा?
अगली सुबह अप्पू को कोर्ट में पेश किया गया. थानेदार सिर पे पट्टी बांधे मौजूद था. जज वो ही आदमी था जिसके जूते अप्पू ने प्लेटफार्म पर पॉलिश किये थे. अप्पू ने जज को नमस्ते किया. पुलिस ने नाबालिग के साथ मारपीट और पुलिस पर हमले की रिपोर्ट पेश की.
क्यूँ छोटे, फिर से तूने कानून हाथ में लिया?
साहबजी, मुझे मेरा चाइना मोबाइल चाहिए अप्पू की आवाज में रौब था.
तू यहाँ जूते पॉलिश करने नहीं आया जो गाना चलायेंगा और कस्टमर लोगो का मन लग जायेंगा जज कड़क आवाज में बोला.
गाने नहीं चलाने हैं साहब, बस 5 मिनट के लिए मुझे मेरा मोबाइल दे दो अप्पू ने हाथ जोड़कर विनती की.
जज ने पुलिस को इशारा किया और अप्पू को उसका मोबाइल दिया गया. अप्पू ने जैसे ही मोबाइल को ऑन किया चाइना मोबाइल का स्टार्टअप साउंड से अदालत का कमरा गूंजने लगा. अप्पू ने मोबाइल में ऑडियो प्ले किया. थानेदार गोपीनाथ के चेहरे का रंग उड़ गया, उसकी आँखें कभी छोटी तो कभी बड़ी होने लगी. दरअसल वो ऑडियो एक रिकॉर्डिंग थी, जो अप्पू ने उसके थानेदार के बीच की बातचीत को थाने में रिकॉर्ड कर दिया था. जज भी हैरान था अप्पू के साथ हुए बेवजह बुरे व्यवहार के लिए.
अब आप ही बताइये साहब, क्या गलत किया मैंने?.... थानेदार ने ही मुझसे कहा तू अपना थैला खुद ढूंढ ले, तो ढूंढ लिया और सजा भी मेरे हिसाब से दे दी, उल्टा अच्छे से फोड़ा वरना पुलिस के हाथ लगता तो 50-100 रूपये में छोड़ देते उसको और जब मैं थैला लेने जाता तो मुझसे भी 50-100 मांग लेते और कोई आपकी बहन को कोठे पे बिठाने की बात करे तो कौन चुप बैठेंगा?
....अप्पू ने जो कुछ भी किया वो थानेदार गोपीनाथ के बुरे व्यवहार के कारण किया, इसलिए यह कोर्ट गोपीनाथ को आदेश देती हैं की जो लड़का बुरी तरह से घायल हुआ उसके इलाज का सारा खर्चा गोपीनाथ उठाएंगा, साथ ही पुलिस डिपार्टमेंट को आदेश देती हैं की अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं करने के लिए गोपीनाथ पर उचित कारवाई करे, अप्पू को बरी किया जाता हैं
शुक्रिया साहबजी, बहुत बहुत शुक्रिया अप्पू ख़ुशी में जोर-जोर से चिल्लाने लगा.
अदालत से बाहर निकलते ही अप्पू को पीछे से पियोन ने आवाज दी.
जज साहब ने तुम्हारे लिए भेजा हैं पियोन ने एक लिफाफा अप्पू को पकड़ाकर चला गया.
अप्पू ने लिफाफा खोला उसमें 500 रूपये थे और एक कागज़ का टुकड़ा, अप्पू ने कागज़ खोला....
....उस दिन तूने मुझसे कहा था की मैंने कोई अच्छा काम किया ही नही तो फिर किस बात का ईनाम, लेकिन आज तो तूने वाकई बहुत अच्छा काम किया जो आज के जमाने में बड़े-बड़े पढ़े-लिखे लोग भी नहीं करते हैं, 500 रूपये मेरी तरफ से तुझे ईनाम हैं, थानेदार की सच्चाई लोगो के सामने लाने की, कल का अखबार जरुर पढना, आखिरकार तेरा चाइना मोबाइल काम आ ही गया, आज यकीन हो गया अप्पू का भी अपना एक स्टाइल हैं
अप्पू ने मुस्कुराते हुए 500 की नोट को चूमा और जेब में रख मोबाइल में गाना चलाया और वहां से चला गया.... 

हट जा रे छोकरे, भेजा ना ठोक रे, आ रेला हैं अपुन, पंगा नहीं करना, दंगा नहीं करना, कर दूँगा मैं वरना, तेरी टाय-टाय फिश्स