....रोमांचक स्तिथि में पहुँच चुका हैं चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला, आखिरी गेंद, भारत को जीत के लिए सिर्फ 3 रन की दरकार, 1 विकेट शेष, क्रीज़ पर मौजूद हैं ‘ऋषिकेश अवस्थी’, अब तक 74 रन की बेहतरीन पारी खेल चुके हैं, इस टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर, टीम को फाइनल तक पहुँचाने में अहम योगदान और आज भी उसने अपनी बल्लेबाजी से निराश नहीं किया, दर्शको की सांसे अटकी हुयी, भारत-द.अफ्रीका खेमा खामोश, दुआओं में आँखें बंद, मेक्सफिल ने तेज कदमो से दौड़ना शुरू किया, आखिरी गेंद तीन रन, एक बाउंड्री या विकेट या कोई रन नहीं.... पॉइंट की दिशा में खेल दिया, मिस फील्ड, गेंद डीप-पॉइंट बाउंड्री की तरफ तेजी से बढती हुई, एक रन पूरा कर लिया, दुसरे के लिए भागे, एरिक ने डाईव लगा कर गेंद को रोक दी हैं, दूसरा रन पूरा कर लिया, एरिक ने थ्रो किया हैं.... तीसरे के लिए भागे हैं.... थ्रो मिस.... इंडिया विन.... इंडिया विन द चैंपियंस ट्रॉफी.... ऋषिकेश इस द हीरो...भारतीय खेमा मैदान में.... टुनाइट इस पार्टी-नाईट.... ऋषिकेश को कंधे पे उठा दिया हैं.... द.अफ्रीका कप्तान डेनबर्ग मायूस-हताश मैदान पे लेट गये हैं.... आसमान आतिशबाजी से जगमगा रहा हैं.... दर्शको में हर्ष की लहर....

          सभी न्यूज़ चैनलों पर भारतीय क्रिकेट टीम के जीत के चर्चे, किसी चैनल पर रिपोर्टर्स क्रिकेट एक्सपर्ट के साथ मिठाई खा रहे थे, कोई रिपोर्टर खिलाडियो के घर उनके माता-पिता के साथ लाइव बातचीत दिखा रहा था. हरियाणा सरकार ने टीम को 15 लाख देने की घोषणा की, तो दिल्ली सरकार ने २० लाख की, ऋषिकेश को
अलग से 5 लाख की, क्रिकेट टीम पर पैसो की बरसात होने लगी थी. खिलाडियों की चांदी होने वाली थी, उन्हें बड़े बड़े ब्रांड्स के एडवरटाईसमेंट्स मिलने वाले थे, सिंग्नल पर बड़े-बड़े पोस्टर.
           भारतीय क्रिकेट टीम स्वदेश लौटी. मुंबई एअरपोर्ट पर फैन्स का हुजूम उमड़ा स्वागत में. एअरपोर्ट से बाहर निकल अपनी बस तक पहुँचने के लिए खिलाड़ियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. देशी-विदेशी मीडिया, पत्रकार. आज यह क्रिकेटर देश के हीरो थे.
          3-4 दिन बाद, कुआलालंपुर का इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम.... भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी एक-दुसरे से गले मिल रहे थे, कुछेक की आँखें नम हो चुकी थी, भारत ने पाकिस्तान को 3-2 से हराकर एशिया कप पर कब्ज़ा कर लिया था, 8 साल के लम्बे इंतज़ार के बाद कोई बड़ा टूर्नामेंट भारत के खाते में आया था, जीत के हीरो थे ‘अमित अवस्थी’, जिसने अतिरिक्त समय में गोल कर ऐतिहासिक जीत दिलाई.

                    देश के कुछेक न्यूज़ चैनल पर स्क्रीन के निचले हिस्से पर बस एक छोटी हेडलाइंस चल रही थी.... भारत ने एशिया कप जीता, फाइनल में पाक को 3-2 से मात दी. इसके अलावा कोई भी न्यूज़ चैनल विस्तार से हॉकी टीम के जीत की चर्चा नहीं कर रहा था. कोई न्यूज़ चैनल सलमान की आने वाली नई फिल्म की खबर दिखा रहा था, तो किसी न्यूज़ चैनल पर कोई तांत्रिक बाबा शनि की बदलती चाल से बचने के उपाय दे रहा था.
          दिल्ली एअरपोर्ट पर भारतीय हॉकी टीम पहुंची. हॉकी खिलाडियों के फैन्स तो दूर की बात एअरपोर्ट पर खड़े लोगो ने भी एक बार उनकी तरफ देखकर मुंह फेर लिया. स्वागत, हॉकी संघ के अधिकारी तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचे. जीत की ख़ुशी खिलाडियों के दिल एक कोने में दबी रो रही थी. कोई मीडिया नहीं, कोई पत्रकार नहीं. एक बुजुर्ग पत्रकार जरुर पहुंचा था, वो कभी भारतीय हॉकी टीम से खेला करता था. हॉकी खिलाड़ी हीरो बनकर भी किसी जीरो से कम नहीं थे.
          माँ-बाबूजी घर से बाहर खड़े अमित के आने की राह देख रहे थे. थोड़े इंतज़ार के बाद एक रिक्शा घर के बाहर आकर रुका. अमित को देखते ही माँ के आंसू छलक पड़े, आखिर उसके बेटे ने जाने से पहले माँ से वादा किया था की वो जीतकर ही लौटेंगा और उसने आखिरकार कर दिखाया. माँ-बाबूजी के पैर छु, उनसे गले मिले घर के भीतर की और मुड़ा तो सामने ऋषिकेश उसकी तरफ मुस्कुराता हुआ आ रहा था.
भैया, बधाई हो! क्या गोल किया था, मजा आ गया, आखिर आपने देश का नाम हॉकी में ऊँचा कर ही लियाऋषिकेश ने अमित को गले लगा दिया.
तेरे को भी बधाईअमित धीमे स्वर में बोला.
सॉरी भाई, एअरपोर्ट लेने नहीं आ सका, आपको पता ही हैं एक क्रिकेटर के कितने फैन्स होते हैं, एअरपोर्ट पर प्रॉब्लम हो जाती हैं, वैसे भी फिलहाल तो मैं देश का हीरो हूँअभिमानस्वरूप ऋषिकेश की आंख्ने बड़ी होने लगी थी.
एक क्रिकेटर देश का हीरो और हॉकी प्लेयर जीरोअमित की आवाज भारी होने लगी थी.
तू दिल ना छोटा ना कर, तू माँ- बाबूजी, मेरा, हम सबका हीरो हैं, चल अंदर चलते हैं
            अमित अपने कमरे की खिड़की में बैठा बाहर गार्डन में क्रिकेट खेलते बच्चो को देख रहा था, लेकिन उसकी नजरों के सामने बार-बार वो अच्छे-बुरे पल एक फिल्म की रील की तरह चल रहे थे, उसका विनिंग गोल, ग्राउंड में जश्न, एअरपोर्ट पर लोगो का मुंह फेरना, मीडिया की अनदेखी.
क्या बात हैं, आज एक हॉकी प्लेयर क्रिकेट देख रहा हैंपीछे की तरफ ऋषिकेश हाथो में दो कॉफ़ी के मग लिए खड़ा था.
अमित ने भावहीन चेहरा लिए ऋषिकेश की तरफ देखा.
कॉफ़ीऋषिकेश ने कॉफ़ी का मग आगे किया.
थैंक्स!’अमित ने मग लिया और फिर से गार्डन की तरफ देखा और बोला....
सोच रहा हूँ, हॉकी छोड़ दु, क्रिकेटर बन जाऊ
क्रिकेट में आपका स्वागत हैं बड़े भैया
क्या बनोंगे बॉलर या बैट्समैन?
मुझे तो बस बेटिंग करनी हैं
ग्रेट
बहुत सारा पैसा कमाना हैं, शोहरत, इज्ज़त, नाम
आज अचानक क्या हो गया आपको, आप तो हमेशा देश के लिए खेलने की बात किया करते थे, अब अपने लिए खेलना चाहते हो
भाड में गया देशप्रेम, इतनी मेहनत से खेलते हैं, पूरी इमानदारी के साथ, लेकिन साला कोई नहीं पूछता हमको, अब देश के लिए नहीं सिर्फ अपने लिए खेलना हैंअमित की आँखें गुस्से में लाल होने लगी थी.
हॉकी राष्ट्रीय खेल, राष्ट्र तो हॉकी देखता ही नहीं, फिर घंटा का राष्ट्रीय खेल. लोग क्रिकेटरों के पीछे पागल हैं. हमारे बारे में किसी ने सोचा, जब हम हॉकी स्टिक लेकर 70 मिनट तक भागते हैं तो एक डर हमेशा सताये रहता हैं की कहीं गेंद आँख पर लग गयी तो, कहीं स्टिक से सीर फुट गया तो और जब गोल पोस्ट के करीब 10-12 खिलाड़ी मशक्कत करते हैं गोल करने या बचाने के लिए तो पिछवाड़ा टाइट हो जाता हैंअमित खिड़की से उतर गया था.
सरकार को तो देश की परवाह नहीं, हॉकी तो दूर की बात हैं, पर कम से कम देश की जनता, मीडिया तो सपोर्ट करेअमित ने कॉफ़ी का मग गुस्से में फर्श पर फेंका और वहाँ चल गया. ऋषिकेश उसे जाते देख मंद-मंद मुस्कुरा रहा था.
           एक आलिशान होटल के बाहर दोनों भाई कार से उतरते हैं और होटल में प्रवेश करते हैं. होटल का कमरा न. 223 जो पहले से ही खुला पड़ा था. उसमे घुसते ही ऋषिकेश ने दरवाजा बंद कर दिया. अंदर एक आधा गंजा, लम्बा आदमी सोफे पर बैठा था. उसके सामने टेबल सिगरेट के बॉक्स और दारु की 2-3 बोतले पड़ी थी. दोनों भाई उसके सामने रखे सोफे पर बैठे.
अमित भैया, इनसे मिलो, रमाकांत देसाई
अमित और रमाकांत एक दुसरे को हेलो बोल अभिवादन करते हैं.
तो आपको रूपये कमाना हैंरमाकांत पेग बनाते हुए बोला.
इन्हें कैसे पता?अंकित चकित निगाहों से ऋषिकेश की तरफ देखना लगा.
यह मैच फ़िक्स करते हैं, तुम्हे रातो-रात मालामाल कर देंगेऋषिकेश बोला.
मतलब तुम फिक्सिंग करते थे, अपने देश के साथ गद्दारीअमित को ऋषिकेश की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था.
हाँ भाई, 5-6 मैच फ्लॉप हो जाऊ तो को नहीं पुछेंगा मुझे, बैंक बैलेंस तो बनाना पड़ेंगा ना
लेकिन टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती तो फिर कैसी फिक्सिंग, फिक्सिंग में तो टीम हारती हैंअमित ने रमाकांत से सवाल किया.
कहावत पुरानी हो गयी अमित भाई की कभी-कभी जीतने के लिए हारना पड़ता, आप जीत कर भी बहुत कुछ जीत सकते हो, बस थोडा इंतज़ार ज्यादा करना पड़ता हैंदारु का एक घूंट लेते हुए रमाकांत बोला.
मैं कुछ समझा नहींअमित जिज्ञासा भरी निगाहों से उसकी तरफ देखने लगा.
....अगर ऋषिकेश चाहता तो मैच 46वें ओवर में ही खत्म हो जाता हैं. लेकिन आखिर बॉल तक का रोमांच आपके बैंक लोकर को आखिरी कोने तक भरता हैं. फाइनल मैच के आखिरी ओवर की आखिरी गेंद याद हैं.
अमित ने हाँ में सीर में हिलाया.  
पॉइंट पर खड़े मेथेव ने मिस फील्ड की थी और डीप-पॉइंट बाउंड्री से एरिक ने जो थ्रो किया वो बॉलर वाले छोर की तरफ किया अगर विकेटकीपर की तरफ किया होता तो मैच टाई हो जाता और सुपर-ओवर खेलना पड़ता, लेकिन दोनों खिलाड़ी पहले ही बिक चुके थे.रमाकांत मुस्कुराने लगे.
लेकिन क्या गारंटी थी की दोनों खिलाड़ी उसी पोजीशन पर खड़े रहेंगे और गेंद भी वैसी ही आयेंगी, कहीं मेक्सफिल?अमित ने सवाल किया.

सही सोचा, मैच में फील्डिंग हर बार कप्तान ही सेट नहीं करता, कभी-कभी बॉलर भी, पहले से ही फिक्स था की मेक्सफिल आखिर ओवर की सभी गेंदे ऑफ में डालेंगा और ऋषिकेश पॉइंट की तरफ खेलेंगा, मेथेव पॉइंट पर मिस-फील्ड करेंगा, एरिक बॉलर वाले छोर की तरफ मिस-थ्रो करेंगा... फिर आगे क्या हुआ यह तो पूरी दुनिया जानती ही हैं....इंडिया विन
क्या गारंटी थी की आखिर तक मैच वैसे ही चलेंगा जैसा तुमने सोचा हैं?
अमित भाई क्रिकेट में गारंटी-वारंटी नहीं चलती, लॉजिक चलते हैं और उन लॉजिक को सही तरीके से इम्प्लेमेंट करते हैं मैदान में सही बन्दे.... आपने नोटिस नहीं किया कि मेक्सफिल और एरिक हमेशा बाउंड्री पर ही फील्डिंग करते थे और बाउंड्री के बाहर बैठे लड़के हमारे मेसेज को उन तक पहुंचाते थे, फिक्सिंग किसी अकेले के बस की बात नहीं हैं, इट इज टीम वर्क
रमाकांत और ऋषिकेश जोर-जोर से हंसने लगे.
कितना मिला तुझे?अमित ने ऋषिकेश से सवाल किया.
भैया ज्यादा नहीं, पुरे टूर्नामेंट का मिलाकर 9 करोड़
मैं तुम्हारे क्या काम आ सकता हूँ?अमित ने रमाकांत की तरफ देखा.
अगले महीने ऑस्ट्रेलिया में हॉकी वर्ल्ड कप होने वाला हैं, बस हॉकी में स्टिकिंग करनी हैं
हॉकी में फिक्सिंग’अमित चौंकते हुए बोला.
अरे अमित भाई इंडिया का नेशनल गेम इंडिया में कोई नही देखता, इंटरनेशनल लेवल पर लोग देखते हैं, सट्टे लगते हैं,  तो बोलो क्या इरादा हैं, करोंगे?
अमित ने काफी देर तक सोच रहा था.
इतना क्या सोच रहे हो अमित भाई आपको भी पता हैं हॉकी प्लेयर को ना इज्ज़त मिलती हैं ना पैसा, एक मौका मिल रहा हैं अपनी जन्नत बनाने का, हाथ से जाने मत दो
आखिरकार अमित ने भी अपना ईमान बेच दिया, उसने रमाकांत और ऋषिकेश के काले कारनामो से हाथ मिला दिया.
सुबह की तक़रीबन 7 बज रही थी. ऋषिकेश फ्रेश होने के लिया उठा था. तभी दरवाजे की बेल बजी. ऋषिकेश ने दरवाजा खोला....
हेलो मिस्टर ऋषिकेश, मैं इंस्पेक्टर राहुल आप्टे, क्राइम ब्रांच मुंबई, हमे आपके खिलाफ मैच फिक्सिंग के सबूत मिले हैं, आपको गिरफ्तार किया जाता हैं
ऋषिकेश की अधखुली आँखें बिना पल गँवाए पूरी खुल गयी.
यही कोई वक़्त हैं पूछताछ करने का
आपने ठीक से सुना नहीं मि.अवस्थी, हम पूछताछ करने नहीं आपको गिरफ्तार करने आये हैं
ऐसे कैसे गिरफ्तार करोगे
जैसे सबको करते हैं, जो कुछ भी कहना हैं कोर्ट में कहना, चलिएआप्टे उसके हाथ पकड़कर चलने के लिए मुड़ा.
अरे पोट्टी तो करने दो मुझे
जेल में इसकी सुविधा भी हैंआप्टे मुस्कुराते हुए बोला.
थोडा शोर सुन सभी घरवाले जगकर बाहर आये तब तक ऋषिकेश क्राइम ब्रांच की गाडी में बैठ जा चुका था. पुरे देश में बात आग की तरह फ़ैल चुकी थी. जो मीडिया देश के हीरो की वाहवाही कर रही थी वो ही उसे आज गालिया दे रहा था. क्राइम ब्रांच ने प्रेस-कांफ्रेंस में खुलासा किया ऋषिकेश और रमाकांत देसाई ने मिलकर मैच फिक्स किए. पुलिस के पास इसके पुख्ता सबूत हैं. रमाकांत देसाई को जिस होटल में वो रुका हुआ था वहाँ से उसे भी गिरफ्तार किया जा चुका था. जिस पोस्टर पर ऋषिकेश हीरो बना था, आज हकीकत का पोस्टर फटते ही वो जीरो निकला. असली हीरो तो अमित था, जिसने अपना ईमान नहीं बेचा.      
अमित, ऋषिकेश से मिलने जेल पहुंचा.
भैया, पुलिस को इसकी भनक कैसे लगी, कुछ पता चला?ऋषिकेश की शक्ल डर से काँप रही थी.
मैंने बताया
तुमने?ऋषिकेश को सांप सूंघ गया था.
जब मैं कुआलालंपुर से लौटा तो इंस्पेक्टर आप्टे ने मुझसे सम्पर्क किया, उन्होंने मुझे बताया की लन्दन की खुफिया एजेंसी से कॉल आया की लॉर्ड्स में खेला गया फाइनल मैच फिक्स था, उस मैच का हीरो ऋषिकेश अवस्थी फिक्सिंग में शामिल था, इंडिया के ही किसी दलाल के साथ मिला था और अब वो दलाल हॉकी वर्ल्ड-कप के मैच फिक्स करने वाला हैं, आप जल्द से जल्द उसे ढूंढ़कर सबूत इक्कट्ठे करे, मुझसे बेहतर उन्हें और कोई नही मिल सकता था, यह तो संजोग की बात हैं की मैं हॉकी प्लेयर और वो भी ऋषिकेश का भाई, उस दिन मैंने तुम्हे अपनी बातों में फंसाया की मुझे बहुत पैसे कमाने है और तुम बेवकूफ निकले जो रमाकांत से मुलाकात करवा दी, होटल के कमरे में जब मिले तब मेरी शर्ट की जेब में पेन में माइक्रोफोन लगा था, सारी बातचीत क्राइम ब्रांच तक पहुँच रही थी, मुझे माफ़ कर देना मेरे भाई, मैं अपने देश के साथ गद्दारी नहीं कर सकता, जब मैं नीली जर्सी पहनकर मैदान में उतरता हूँ तो सिर्फ उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए खेलता हूँ, अलविदा
सच सुनकर ऋषिकेश के मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी, वो गुस्से में जेल की सलाखों पे लाते-घूंसे बरसा रहा था.
अमित अपने लटकाए मुंह से अपनी बाइक पर सवार घर की तरफ जा रहा था.
तभी उसके सामने एक वेन आकर रुकी, अमित ने तेजी से ब्रेक लगाये, काफी देर तक वो अमित वेन को घूरता रहा, फाटक खुलते ही, वेन में बैंठे नकाबपोशो ने अमित पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी,
मार इस ईमानदार साले को, करोडो का नुकसान करा दियाएक नकाबपोश वेन की अगली सीट पर बैठा चिल्ला रहा था.

5 मिनट तक फायर में अमित खून से लथपथ सड़क पर मर चुका था, वेन चली गयी, वेन पर कोई नेम-प्लेट नहीं थी, पब्लिक इक्कठा हो चुका थी, पुलिस भी मौके पर पहुँच चुकी थी, पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया.
शाम का वक़्त था जिस जगह अमित को मारा, उस सड़क के पास ही फूटपाथ पर दो छोटे बच्चे, उम्र करीब होंगी 7-8 साल, दोनों के हाथ में एक-एक लकड़ी, दोनों एक दुसरे से दूर खड़े, प्लास्टिक की बॉल से खेल रहे थे, एक लड़का दुसरे की तरफ लकडी से बॉल मारता फिर दूसरा अपनी तरफ आती बॉल को  अपनी लकड़ी से वापस उसकी तरफ मारता....
फूटपाथ से सटी दीवार पर कोयले से कुछ पंक्तिया लिखी हुई थी....
तू खुदा भी अजब गजब का....
दुनिया में बिकता जमीर इंसान का....
जो न बिकता....
तू उसे खरीदकर....
अपने पास बुला लेता....