जोधपुर का नामचीन इलाका, जहाँ जितने हिन्दुओ के घर हैं, उतने ही मुसलमानों के| हर रोज की तरह उस सुबह भी राज अपने घर की छत पे बैठे मोहल्ले की गली से जेनम के गुजरने का इंतज़ार कर रहा था| जेनम, राज के पडौस में रहने वाले खालिद मियां की सबसे छोटी बेटी थी| वह टकटकी लगाए अपनी नजरे सड़क पर जमाये बैठा था| वक़्त भले ही तेजी से कट रहा था, मगर इंतज़ार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था| तभी अगले ही पल एक आवाज राज के धडकनों में समाते हुए, उसके होंठो पे एक प्यारी मुस्कान छोड़ गयी|
अब्बू मैं जा रही हूँ|
                 जेनम हर रोज मदरसा जाने से पहले अपने अब्बू को थोड़े जोर से बताया करती थी| जोर से बताना तो सिर्फ एक बहाना था, दरअसल यह तो राज के नाम पैगाम था| जेनम भी राज को बेहद पसंद करती थी| उसे पता था की हर सुबह राज छत पे बैठा उसका इंतज़ार करता था|
                       जेनम को अपने सामने से गुजरता देख राज का चेहरा खिल उठता था|         जेनम सिर से पैर तक बुर्के में ढकी हुयी थी, यहाँ तक की उसने अपने हाथो में भी दस्ताने पहन रखे थे, फिर भी राज उसकी एक झलक के लिए हर सुबह बेसब्री से इंतज़ार किया करता था| जमाने के डर से जेनम में इतनी हिम्मत नहीं थी की वो एक बार अपनी निगाहें ऊपर उठकर उसकी तरफ देखे| वो तो बस अपनी आँखे बंद कर मन ही मन राज से माफ़ी मांगती हुयी अपने कदम आगे बढ़ाती रहती थी|
                              राज उसे तब तक देखता रहता, जब तक वो उसकी नजरों से ओझल न हो जाए| उसकी नजरों से जेनम के ओझल होते ही वो सीढियों से नीचे उतरते हुए घर के भीतर अपने कमरे में पहुँचा|
                             कमरा तस्वीरो से भरा हुआ था| सब तस्वीरो में एक ही चेहरा था जेनम का| राज ने अलमारी से ब्रश और रंग निकाला और अगले ही पल अपनी आँखे बंद की| जेनम के एक और चेहरे की ख़ूबसूरती को तस्वीर में उतारने के लिए अपनी यादो में खो चुका था|
                             कुछ महीनो पहले जोधपुर में काफी तेज़ आंधी आयी थी| उस वक़्त राज और जेनम अपनी-अपनी छत पर कपडे समेट रहे थे| तभी अचानक तेज हवा का एक झोंका, जेनम के चेहरे को बेपर्दा कर गया| राज कपड़ो को समेटना भूलकर उसके चेहरे की ख़ूबसूरती में खो गया था| राज के हाथ में पकड़े हुए कपडे उसके हाथ से छूटकर छत पर इधर-उधर उड़ने लगे थे| वहीँ दूसरी तरफ जेनम अपने बुर्के को संभालने की कोशिश कर ही रही थी की उसकी नजर राज पर पड़ी| राज टकटकी लगाए उसे निहार रहा था| वो भी राज की आँखों में देखते-देखते इतनी मशगुल हो चुकी थी की वो भूल चुकी थी की उसके चेहरे पर से पर्दा हट गया था| बस फिर क्या था उसी दिन से उन दोनों के बीच मोहब्बत के किस्से दिल के कागज पे लिखने शुरू हो गये थे|

                             राज को फिर कभी उसके चेहरे की एक झलक देखने का मौका न मिला,
उसकी उस एक झलक को हर रोज अपनी कल्पना के बल पर तस्वीर में समटने की कोशिश करता और सोचता की आज वो अगर बुर्के में ना होती तो कैसी दिखती, उसकी आँखें का वो नशा, गालो की लाली, लहराते हुए लम्बे बाल, होंठो पर बेअल्फाजो का साया, आकर्षित, खूबसूरत.... उसका चेहरा|
                               जेनम और उसकी चचेरी बहन फरजाना के सिवाय बाकी सब घरवाले पडौस के गाँव किसी के निकाह में गये हुए थे| घर पर एक कारपेंटर पलंग, दरवाजे ठीक करने आया हुआ था| इसी वजह से जेनम और फरजाना अपने ही घर में बुर्के में थी सिवाय आँखों के|
प्यार हुआ तुझे कभी?फरजाना ने जेनम से पूछा|
नहींजेनम ने अपनी नजरे झुकाते हुए धीरे से कहा|
 “तो वो छत वाला लड़का कौन हैं?फरजाना ने असली मुद्दे पर लौटने में कतई देर न की|
                                राज का नाम सुनते ही जेनम के बुर्के के भीतर दो दियें पहले से ज्यादा तेज़ टिमटिमाने लगे थे| उसे अतीत से जुड़ा तेज आंधी वाला किस्सा उसकी आँखों के सामने तैरने लगा था|
कुछ नहींजेनम की आवाज पहले से और धीमी थी|
तो रोज मदरसा जाने से पहले जोर से अब्बू को कहकर क्यूँ जाती हैं, अब्बू अभी बहरे नहीं हुए समझी, तेरा इश्क बहरा हो गया तो तू उसे सुनाती हैं
जेनम की आँखें इधर-उधर छुपने की जगह ढूंढने लगी थी|
और जब भी तू उसके छत के नीचे से गुजरती हैं तो तेरे कदम धीमे क्यूँ पड जाते हैं, उस वक़्त तेरे हाथो की मुट्ठी तनिक ही कस के क्यूँ बंध जाती हैं, फिर तू उसे वापस खोलती हैं अपनी उंगुलियों को सहलाती हैं और वापस मुट्ठी बंध
                                  जेनम के पास कोई जवाब न था| छुपने की जगह ढूंढ रही उसकी आँखें एक जगह आकर स्थिर हो गयी थी| तभी घर पर एक कुरिअर वाला पहुंचा लाल आयताकार बॉक्स के साथ| किसी का नाम न था उस पर| जेनम फरजाना की बातों में खोयी हुयी थी| फरजाना ने कुरिअर खोला और जोर से चीलाई....
जेनम तू
                                   जेनम ने तनिक ही उसकी तरफ देखा और मानो उसकी आँखें के टिमटिमाते दियें बुझ गये हो| उस कुरिअर में एक तस्वीर थी, और उस तस्वीर में था जेनम का ‘चेहरा’| कभी आयने में भी जेनम ने अपना इतना खूबसूरत चेहरा ना देखा होंगा, जितना तस्वीर बयां कर रही थी| दोनों की नजर फर्श पर पड़े लिफ़ाफ़े पर अटक गयी| फरजाना का हाथ पहुँचने से पहले ही जेनम ने लिफाफ उठा दिया और बढती नब्जो से भी तेज गति से लिफाफा खोला|
मुझे नहीं पता तुम मेरा नाम जानती हो की नहीं, लेकिन इतना तुम्हे जरुर पता हैं की मैं हर रोज छत पर बैठा तुम्हारे गुजरने का इंतज़ार करता हूँ| मुझे नहीं पता तुम्हे मेरा इंतज़ार करने का सलूक पसंद आता हैं की नहीं, पर तुम्हारी एक आवाज मुझे अगली सुबह के इंतज़ार तक कैद करके रखती हैं| कभी आपसे रूबरू होने का मौका तो ना मिला, बस शुक्रगुजार हूँ मैं मौसम के देवता का जिन्होंने आंधी जैसी प्राकतिक आपदा का निर्माण किया, जिसने तुमसे इश्क को मेरे रग-रग में बसाने की शुरुआत की| बस एक चेहरा और कुछ नही मेरे दिल में, तुम्हे वापस लौटा रहा हूँ| मैं कल जोधपुर से जा रहा हूँ, पता नहीं वापस कब लौटूंगा| मुझे पता हैं आपके घर पर कोई नहीं हैं, बस एक आखिरी बार आपके चेहरे का दीदार करना चाहूँगा| इंतज़ार करूँगा मसुरिया पहाड़ी पर शाम 6 बजे| मुझे उम्मीद हैं आप जरुर आओंगे| राज
                         कागज़ जेनम के हाथ से छुटकर हवा में तैरने लगा था और जेनम की आँखों से आंसू बुर्के में समने लगे थे|
तू भी उससे प्यार करती हैं नाफरजाना ने सवाल किया|
पता नहीं, बस उसे रोज छत पर बैठें मेरा इंतज़ार करता देख अच्छा महसूस लगता हैं, मुझे नहीं पता अब्बू को बोलते वक़्त आवाज क्यूँ तेज हो जाती हैंजेनम रुहांसी आवाज में बोल रही थी|
मुझे लगता तुम्हे उसे सब सच बता देना चाहिएफरजाना ने सलाह दी|
नहीं, उसका दिल टूट जायेंगा, उसे कभी सच पता ना चले
अगर तू आज उससे मिलने न भी जायेंगी तो भी उसका दिल टूट जायेंगा, एक झूठ से दिल टूटे, उससे बेहतर तो एक सच हैं, इसलिए हम आज शाम जा रहे हैं उससे मिलने
                          राज, जेनम के आने का इंतज़ार कर रहा था| पता नहीं क्यूँ उसे इतना विश्वास था की वो जरुर आएँगी| उसके कलाई पर घडी थी फिर भी वो अपनी नजर उससे बचा रहा था, शायद धडकनों की रफ़्तार को वक़्त की रफ़्तार से नहीं तौलना चाहता था| वो इधर-उधर चहलकदमी कर रहा था| वहाँ पर कहीं जोड़े एक-दुसरे के साथ बैठे थे, राज उनकी तरफ देखता और फिर अपना मुंह फेर लेता| पास ही में एक होटल के काउंटर पर रेडियो पर हीर-रांझा फिल्म के एक गाने के रफी साहब के बोल चल रहे थे उसको खुदा मिले हैं खुदा की जिन्हें तलाश, मुझको बस एक झलक मेरे दिलदार की मिले
                           तभी थोड़ी दूर उसे दो बुर्के में लडकियाँ आती हुयी दिखाई दी| राज की चहलकदमी रुक गयी, उसकी नजरे उन बुर्के के करीब आने का इंतज़ार कर रही थी| साथ ही उसके दिल में कहीं सवाल बन रहे थे की सच में वो जेनम ही हैं या कोई और? क्या सच में जेनम उससे प्यार करती हैं जो मुझसे मिलने आ गयी? और भी बहुत सवाल|
                           दोनों राज के सामने आकर रुकी| राज बुर्के के हटने का इंतज़ार कर रहा था| तभी फरजाना ने इधर उधर देखा और चेहरे पर से बुर्का हटा दिया| राज की आँखें खुशनुमा लगने लगी थी की दूसरी लड़की जेनम ही हैं और कोई नहीं|
राज, तुम कुछ और सोचो इससे पहले हम तुम्हे एक सच बताने आये हैंफरजाना ने राज को बोलने का मौका ही नहीं दिया|
आप हमें भूल जाइए, हम आपके प्यार के काबिल नहीं हैंजेनम बीच में ही बोल पड़ी|
प्यार कभी किसी का मोहताज नहीं होता, लेकिन काबिल जरुर होता क्यूंकि यह हर किसी से तो नहीं होता, भीड़ में किसी एक से ही और वो एक उसके काबिल होता हैं
राज बार-बार जेनम के चेहरे की तरफ देख रहा था की कब वो बेपर्दा हो|
आप क्यों नहीं समझ रहे हो मैं क्या कहना चाहती हूँ
और मैं समझना भी नहीं चाहता, बस एक बात ही समझ नहीं आती की एक बार ही उस चेहरे के दीदार ने मुझे इतना दीवाना कैसे बना दिया
भूल जाओ उस चेहरे को हमेशा के लिए
                             तभी अचानक पहाड़ी पर तेज हवाए चलने लगी, मिट्टी उड़ने लगी, बुर्के हवा में इधर-उधर लड़ रहे थे हवा के तेज झोंको से| तभी अचानक एक तेज हवा के झोंके से फरजाना का चेहरा बुर्के में छुप गया और जेनम का चेहरा आजाद हो गया| राज की आँखें फटी की फटी ही रह गयी| जेनम का चेहरा जगह जगह से जला हुआ था| थोड़े दिन पहले रसोई में खाना बनाते वक़्त एक हादसे में जल गया था| जेनम अपना चेहरा छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन तेज हवा में उसकी हर कोशिश नाकाम थी| राज को जो कुछ भी कहना था उससे वो जीभ के तालू तक आकर वापस उल्टे पाँव लौट गया| तभी जेनम जैसे-तैसे अपना चेहरा छुपाते हुए वहाँ से भागने लगी| फरजाना उसे रोकने के लिए उसके पीछे गयी| पर राज बस वहीँ का वहीँ खड़ा था, उसका जला चेहरा ही उसकी आँखों के सामने घूम रहा था| हवाए थम गयी थी लेकिन राज तो कब का थम चुका था|
                               अगली सुबह जेनम मदरसा जाने के लिए जैसे ही रवाना हुई वो जोर से अब्बू को बताना चाहती थी तभी उसे राज का ख्याल आया की वो तो जोधपुर से चला गया होंगा तो फिर वो किसे सुनाएंगी और अगर नही भी गया होंगा तो वो आज छत पर नहीं होंगा क्यूंकि जिस चेहरे का वो दीवाना था वो चेहरा अब चेहरा न रहा था| बस यही बात सोचते-सोचते उसकी आँखें भीग चुकी थी| वो तेज रफ़्तार से अपने कदम बढाने लगी, लेकिन जैसे राज की छत के नीचे पहुंची, अनायास उसके कदम धीमे हो गये| तभी उसने अहिस्ता-अहिस्ता छत की तरफ देखा और उसके कदम रुक गये....
                                राज आज भी वहीँ बैठा था और हर रोज की तरह वो आज भी मुस्कुरा रहा था| जेनम की आँखें कब सुख गयी उसे भी पता नही चला| उसके हाथो की मुट्ठी तनिक ही कस के बंध गयी, फिर उसे वापस खोलती हैं अपनी उंगुलियों को सहलाती हैं और वापस मुट्ठी बंध| राज ने एक कागज का टुकड़ा उसके पैरो में फेंका| जेनम नीचे झुकी जैसे वो अपना चप्पल ठीक कर रही हो और कागज़ उठा दिया, उसने कागज़ खोला और पढ़ा मैं जोधपुर से जाना तो चाहता था पर अब नहीं, क्यूंकि अब मैं चला गया तो तुम सोचोगी की मैं बस तुम्हारे चेहरे से आकर्षित था, कोई प्यार-व्यार नहीं था, मुझे हर सुबह छत पर बैठे ही प्यार की दास्ताँ महसूस करनी हैं फिर उसे तस्वीर में समेटना हैं, राज!| तभी उसे जमाने का ख्याल आ गया और ख़ुशी-ख़ुशी वो अपने कदम आगे बढ़ने लगी| राज उसे तब तक देखता रहा जब तक वो आँखों से ओझल ना हो जाए| आँखों से ओझल होते ही वो वहाँ से अपने घर के भीतर भागने लगा, क्यूंकि फिर एक ‘चेहरा’ उतावला हो रहा था उसके जेहन में, तस्वीर में उतरने को|